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Hindisexstories - तीन भाभियाँ की चुदाई

Sunday, 10 April 2016 | 0 comments

Hindisexstories - तीन भाभियाँ की चुदाई

http://storieswithmovies.blogspot.in/2016/04/hindisexstories.html
नमस्ते,

में हूँ मंगल. आज में आप को हमारे खंडन की सबसे खनगी बात बताने जा रहा हूँ मेरे हिसाब से मैंने कुछ बुरा किया नहीं है हालन की काई लोग मुझे पापी समज़ेंगे. कहानी पढ़ कर आप ही फ़ैसला कीजिएगा की जो हुआ वो सही हुआ है या नहीं.

कहानी काई साल पहले की उन दीनो की है जब में अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया, काशी राम चौथी शादी करना सोच रहे थे.

हम सब राजकोट से पच्चास किलोमेटर दूर एक छ्होटे से गाओं में ज़मीदार हैं एक साओ बिघन की खेती है और लंबा चौड़ा व्यवहार है हमारा. गाओं मे चार घर और कई दुकानें है मेरे माता-पिताजी जब में दस साल का था तब मार गए थे. मेरे बड़े भैया काश राम और भाभी सविता ने मुझे पल पोस कर बड़ा किया.

भैया मेरे से तेरह साल बड़े हें. उन की पहली शादी के वक़्त में आठ साल का था. शादी के पाँच साल बाद भी सविता को संतान नहीं हुई. कितने डॉकटर को दिखाया लेकिन सब बेकार गया. भैया ने डूसरी शादी की, चंपा भाभी के साथ तब मेरी आयु तेरह साल की थी.

लेकिन चंपा भाभी को भी संतान नहीं हुई. सविता और चंपा की हालत बिगड़ गई, भैया उन के साथ नौकरानीयों जैसा व्यवहार कर ने लगे. मुझे लगता है की भैया ने दो नो भाभियों को छोड़ना चालू ही रक्खा था, संतान की आस में.

डूसरी शादी के तीन साल बाद भैया ने तीसरी शादी की, सुमन भाभी के साथ. उस वक़्त में सोलह साल का हो गया था और मेरे बदन में फ़र्क पड़ना शुरू हो गया था. सब से पाहेले मेरे वृषाण बड़े हो गाये बाद में कखह में और लोडे पैर बाल उगे और आवाज़ गाहेरा हो गया. मुँह पैर मुच्च निकल आई. लोडा लंबा और मोटा हो गया. रात को स्वप्न-दोष हो ने लगा. में मूट मारना सिख गया.

सविता और चंपा भाभी को पहली बार देखा तब मेरे मान में छोड़ने का विचार तक आया नहीं था, में बच्चा जो था. सुमन भाभी की बात कुच्छ ओर थी. एक तो वो मुज़से चार साल ही बड़ी थी. दूसरे, वो काफ़ी ख़ूबसूरत थी, या कहो की मुझे ख़ूबसूरत नज़र आती थी. उसके आने के बाद में हैर रात कल्पना किए जाता था की भैया उसे कैसे छोड़ते होंगे और रोज़ उस के नाम मूट मार लेता था. भैया भी रात दिन उसके पिच्छे पड़े रहते थे. सविता भाभी और चंपा भाभी की कोई क़ीमत रही नहीं थी. में मानता हूँ है की भैया चांगे के वास्ते कभी कभी उन दो नो को भी छोड़ते थे. तजुबई की बात ये है की अपने में कुच्छ कमी हो सकती है ऐसा मानने को भैया तैयार नहीं थे. लंबे लंड से छोड़े और ढेर सारा वीरय पत्नी की छूट में उंदेल दे इतना काफ़ी है मर्द के वास्ते बाप बनाने के लिए ऐसा उन का दरध विस्वास था. उन्होने अपने वीरय की जाँच करवाई नहीं थी.

उमर का फ़ासला काम होने से सुमन भाभी के साथ मेरी अचची बनती थी, हालन की वो मुझे बच्चा ही समाजति थी. मेरी मौजूदगी में कभी कभी उस का पल्लू खिसक जाता तो वो शरमति नहीं थी. इसी लिए उस के गोरे गोरे स्तन देखने के कई मौक़े मिले मुझे. एक बार स्नान के बाद वो कपड़े बदल रही थी और में जा पहुँचा. उस का आधा नंगा बदन देख में शरमा गया लेकिन वो बिना हिच किचत बोली, ‘दरवाज़ा खीत ख़िता के आया करो.’

दो साल यूँ गुज़र गाये में अठारह साल का हो गया था और गाओं की सचूल की 12 वी में पढ़ता था. भैया चौथी शादी के बारे में सोचने लगे. उन दीनो में जो घटनाएँ घाटी इस का ये बयान है

बात ये हुई की मेरी उम्र की एक नोकारानी, बसंती, हमारे घर काम पे आया करती थी. वैसे मैंने उसे बचपन से बड़ी होते देखा था. बसंती इतनी सुंदर तो नहीं थी लेकिन चौदह साल की डूसरी लड़कियों के बजाय उस के स्तन काफ़ी बड़े बड़े लुभावने थे. पतले कपड़े की चोली के आर पार उस की छोटी छोटी निपपलेस साफ़ दिखाई देती थी. में अपने आप को रोक नहीं सका. एक दिन मौक़ा देख मैंने उस के स्तन थाम लिया. उस ने ग़ुस्से से मेरा हाथ ज़टक डाला और बोली, ‘आइंदा ऐसी हरकत करोगे तो बड़े सेठ को बता दूँगी’ भैया के दर से मैंने फिर कभी बसंती का नाम ना लिया.

एक साल पहले सत्रह साल की बसंती को ब्याह दिया गया था. एक साल ससुराल में रह कर अब वो दो महीनो वास्ते यहाँ आई थी. शादी के बाद उस का बदन भर गया था और मुझे उस को छोड़ने का दिल हो गया था लेकिन कुच्छ कर नहीं पता था. वो मुज़ से क़तराती रहती थी और में दर का मारा उसे दूर से ही देख लार तपका रहा था.

अचानक क्या हुआ क्या मालूम, लेकिन एक दिन महॉल बदल गया. दो चार बार बसंती मेरे सामने देख मुस्कराई. काम करते करते मुझे गौर से देखने लगी मुझे अचच्ा लगता था और दिल भी हो जाता था उस के बड़े बड़े स्तनों को मसल डालने को. लेकिन दर भी लगता था. इसी लिए मैंने कोई प्रतिभव नहीं दिया. वो नखारें दिखती रही.

एक दिन दोपहर को में अपने स्टूदय रूम में पढ़ रहा था. मेरा स्टूदय रूम अलग मकान में था, में वहीं सोया करता था. उस वक़्त बसंती चली आई और रोटल सूरत बना कर कहने लगी ‘इतने नाराज़ क्यूं हो मुज़ से, मंगल ?’

मैंने कहा ‘नाराज़ ? में कहाँ नाराज़ हूँ ? में क्यूं हौन नाराज़?’

उस की आँखों में आँसू आ गाये वो बोली, ‘मुझे मालूम है उस दिन मैंने तुमरा हाथ जो ज़टक दिया था ना ? लेकिन में क्या करती ? एक ओर दर लगता था और दूसरे दबाने से दर्द होता था. माफ़ कर दो मंगल मुझे.’

इतने में उस की ओधनी का पल्लू खिसक गया, पता नहीं की अपने आप खिसका या उस ने जान बुज़ के खिसकया. नतीजा एक ही हुआ, लोव कूट वाली चोली में से उस के गोरे गोरे स्तनों का उपरी हिस्सा दिखाई दिया. मेरे लोडे ने बग़ावत की नौबत लगाई.

में, उस में माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है म..मैंने नाराज़ नहीं हूँ तो मुझे मागणी चाहिए.’

मेरी हिच किचाहत देख वो मुस्करा गयी और हास के मुज़ से लिपट गयी और बोली, ‘सच्ची ? ओह, मंगल, में इतनी ख़ुश हूँ अब. मुझे दर था की तुम मुज़ से रुत गाये हो. लेकिन में टुमए माफ़ नहीं करूंगी जब तक तुम मेरी चुचियों को फिर नहीं छ्छुओगे.’ शर्म से वो नीचा देखने लगी मैंने उसे अलग किया तो उस ने मेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ अपने स्तन पैर रख दिया और दबाए रक्खा.

‘छोड़, छोड़ पगली, कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.’

‘तो होने दो. मंगल, पसंद आई मेरी च्छुचि ? उस दिन तो ये कच्ची थी, छ्छू ने पैर भी दर्द होता था. आज मसल भी डालो, मज़ा आता है

मैंने हाथ छ्छुड़ा लिया और कहा, ‘चली जा, कोई आ जाएगा.’

वो बोली, ‘जाती हूँ लेकिन रात को आओुंगी. आओउन ना ?’

उस का रात को आने का ख़याल मात्र से मेरा लोडा टन गया. मैंने पूच्छा, ‘ज़रूर आओगी?’ और हिम्मत जुटा कर स्तन को छ्ुा. विरोध किए बिना वो बोली,

‘ज़रूर आओुंगी. तुम उपर वाले कमरे में सोना. और एक बात बताओ, तुमने किस लड़की को छोड़ा है ?’ उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया मगर हटाया नहीं.

‘नहीं तो.’ कह के मैंने स्तन दबाया. ओह, क्या चीज़ था वो स्तन. उस ने पूच्छा, ‘मुझे छोड़ना है ?’ सुन ते ही में छोंक पड़ा.

‘उन्न..ह..हाँ

‘लेकिन बेकिन कुच्छ नहीं. रात को बात करेंगे.’ धीरे से उस ने मेरा हाथ हटाया और मुस्कुराती चली गयी

मुझे क्या पता की इस के पिच्छे सुमन भाभी का हाथ था ?

रात का इंतज़ार करते हुए मेरा लंड खड़ा का खड़ा ही रहा, दो बार मूट मरने के बाद भी. क़रीबन दस बजे वो आई.

‘सारी रात हमारी है में यहाँ ही सोने वाली हूँ उस ने कहा और मुज़ से लिपट गयी उस के कठोर स्तन मेरे सीने से डब गाये वो रेशम की चोली, घाघारी और ओधनी पहेने आई थी. उस के बदन से मादक सुवास आ रही थी. मैंने ऐसे ही उस को मेरे बहू पाश में जकड़ लिया

‘हाय डैया, इतना ज़ोर से नहीं, मेरी हड्डियान टूट जाएगी.’ वो बोली. मेरे हाथ उस की पीठ सहालाने लगे तो उस ने मेरे बालों में उंगलियाँ फिरनी शुरू कर दी. मेरा सर पकड़ कर नीचा किया और मेरे मुँह से अपना मुँह टीका दिया.

उस के नाज़ुक होत मेरे होत से छूटे ही मेरे बदन में ज़्रज़ुरी फैल गयी और लोडा खड़ा होने लगा. ये मेरा पहला चुंबन था, मुझे पता नहीं था की क्या किया जाता है अपने आप मेरे हाथ उस की पीठ से नीचे उतर कर छूटड़ पर रेंगने लगे. पतले कपड़े से बनी घाघारी मानो थी ही नहीं. उसके भारी गोल गोल नितंब मैंने सहलाए और दबोचे. उसने नितंब ऐसे हिलाया की मेरा लंड उस के पेट साथ डब गया.

थोड़ी देर तक मुह से मुँह लगाए वो खड़ी रही. अब उस ने अपना मुँह खोला और ज़बान से मेरे होत चाटे. ऐसा ही करने के वास्ते मैंने मेरा मुँह खोला तो उस ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. मुझे बहुत अचच्ा लगा. मेरी जीभ से उस की जीभ खेली और वापस चली गयी अब मैंने मेरी जीभ उस के मुँह में डाली. उस ने होत सिकूड कर मेरी जीभ को पकड़ा और चूस. मेरा लंड फटा जा रहा था. उस ने एक हाथ से लंड टटोला. मेरे तटर लंड को उस ने हाथ में लिया तो उत्तेजना से उस का बदन नर्म पद गया. उस से खड़ा नहीं रहा गया. मैंने उसे सहारा दे के पलंग पैर लेताया. चुंबन छोड़ कर वो बोली, ‘हाय, मंगल, आज में पंद्रह दिन से भूकि हूँ पिच्छाले एक साल से मेरे पति मुझे हर रोज़ एक बार छोड़ते है लेकिन यहाँ आने के मुझे जलदी से छोड़ो, में मारी जा रही हूँ

मुसीबत ये थी की में नहीं जनता था की छोड़ने में लंड कैसे और कहाँ जाता है फिर भी मैंने हिम्मत कर के उस की ओधनी उतर फेंकी और मेरा पाजामा निकल कर उस की बगल में लेट गया. वो इतनी उतावाली हो गई थी की चोली घाघारी निकल ने रही नहीं. फटाफट घाघारी उपर उठाई और जांघें चौड़ी कर मुझे उपर खींच लिया. यूँ ही मेरे हिप्स हिल पड़े थे और मेरा आठ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अंधे की लकड़ी की तरह इधर उधर सर टकरा रहा था, कहीं जा नहीं पा रहा था. उस ने हमारे बदन के बीच हाथ डाला और लंड को पकड़ कर अपनी भोस पैर दीरेक्ट किया. मेरे हिप्स हिल ते थे और लंड छूट का मुँह खोजता था. मेरे आठ दस धक्के ख़ाली गाये हैर वक़्त लंड का मट्ता फिसल जाता था. उसे छूट का मुँह मिला नहीं. मुझे लगा की में छोड़े बिना ही ज़द जाने वाला हूँ लंड का मट्ता और बसंती की भोस दोनो काम रस से तार बतर हो गाये थे. मेरी नाकामयाबी पैर बसंती हास पड़ी. उस ने फिर से लंड पकड़ा और छूट के मुँह पैर रख के अपने छूटड़ ऐसे उठाए की आधा लंड वैसे ही छूट में घुस गया. तुरंत ही मैंने एक धक्का जो मारा तो सारा का सारा लंड उस की योनी में समा गया. लंड की टोपी खीस गयी और चिकना मट्ता छूट की दीवालों ने कस के पकड़ लिया. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की में रुक नहीं सका. आप से आप मेरे हिप्स तल्ला देने लगे और मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए बसंती की छूट को छोड़ने लगा. बसंती भी छूटड़ हिला हिला कर लंड लेने लगी और बोली, ‘ज़रा धीरे छोड़, वरना जल्दी ज़द जाएगा.’

मैंने कहा, ‘में नहीं छोड़ता, मेरा लंड छोड़ता है और इस वक़्त मेरी सुनता नहीं है

‘मार दालोगे आज मुझे,’ कहते हुए उस ने छूटड़ घुमए और छूट से लंड दबोचा. दोनो स्तानो को पकड़ कर मुँह से मुँह छिपका कर में बसंती को छोड़ते चला.

धक्के की रफ़्तार में रोक नहीं पाया. कुच्छ बीस पचीस तल्ले बाद अचानक मेरे बदन में आनंद का दरिया उमड़ पड़ा. मेरी आँखें ज़ोर से मूँद गयी मुँह से लार निकल पड़ी, हाथ पाँव आकड़ गाये और सारे बदन पैर रोएँ ए खड़े हो गाये लंड छूट की गहराई में ऐसा घुसा की बाहर निकल ने का नाम लेता ना था. लंड में से गरमा गरम वीरय की ना जाने कितनी पिचकारियाँ छ्छुथी, हैर पिचकारी के साथ बदन में ज़ुरज़ुरी फैल गयी थोड़ी देर में होश खो बेइता.

जब होश आया तब मैंने देखा की बसंती की टाँगें मेरी कमर आस पास और बाहें गार्दन के आसपास जमी हुई थी. मेरा लंड अभी भी ताना हुआ था और उस की छूट फट फट फटके मार रही थी. आगे क्या करना है वो में जनता नहीं था लेकिन लंड में अभी गुड़गूदी होती रही थी. बसंती ने मुझे रिहा किया तो में लंड निकल कर उतरा.

‘बाप रे,’ वो बोली, ‘इतनी अचची छुड़ाई आज कई दीनो के बाद की.’

‘मैंने तुज़े ठीक से छोड़ा ?’

‘बहुत अचची तरह से.’

हम अभी पलंग पैर लेते थे. मैंने उस के स्तन पैर हाथ रक्खा और दबाया. पतले रेशमी कपड़े की चोली आर पार उस की कड़ी निपपले मैंने मसाली. उस ने मेरा लंड टटोला और खड़ा पा कर बोली, ‘अरे वाह, ये तो अभी भी तटर है कितना लंबा और मोटा है मंगल, जा तो, उसे धो के आ.’

में बाथरूम में गया, पिसब किया और लंड धोया. वापस आ के मैंने कहा, ‘बसंती, मुझे तेरे स्तन और छूट दिखा. मैंने अब तक किसी की देखी नहीं है

उस ने चोली घाघारी निकल दी. मैंने पहले बताया था की बसंती कोई इतनी ख़ूबसूरत नहीं थी. पाँच फ़ीट दो इंच की उँचाई के साथ पचास किलो वज़न होगा. रंग सांवला, चहेरा गोल, आँखें और बल काले. नितंब भारी और चिकाने. सब से अचच्े थे उस के स्तन. बड़े बड़े गोल गोल स्तन सीने पैर उपरी भाग पैर लगे हुए थे. मेरी हथेलिओं में समते नहीं थे. दो इंच की अरेओला और छोटी सी निपपले काले रंग के थे. चोली निकल ते ही मैंने दोनो स्तन को पकड़ लिया, सहलाया, दबोचा और मसला.

उस रात बसंती ने मुझे पुख़्त वाय की भोस दिखाई. मोन्स से ले कर, बड़े होत, छ्होटे होत, क्लटोरिस, योनी सब दिखाया. मेरी दो उंगलियाँ छूट में डलवा के छूट की गहराई भी दिखाई, ग-स्पोत दिखाया. वो बोली, ‘ये जो क्लटोरिस है वो मरद के लंड बराबर होती है छोड़ते वक़्त ये भी लंड की माफ़िक कड़ी हो जाती है दूसरे, तू ने छूट की दिवालें देखी ? कैसी कारकरी है ? लंड जब छोड़ता है तब ये कारकरी दीवालों के साथ घिस पता है और बहुत मज़ा आता है हाय, लेकिन बच्चे का जन्म के बाद ये दिवालें चिकानी हो जाती है छूट चौड़ी हो जाती है और छूट की पकड़ काम हो जाती है

मुझे लेता कर वो बगल में बेइत गयी मेरा लंड तोड़ा सा नर्म होने चला था, उस को मुट्ठि में लिया. टोपी खींच कर मट्ता खुला किया और जीभ से चटा. तुरंत लंड ने तुमका लगाया और तटर हो गया. में देखता रहा और उस ने लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी मुँह में जो हिस्सा था उस पैर वो जीभ फ़ीयरती थी, जो बाहर था उसे मुट्ठि में लिए मूट मरती थी. दूसरे हाथ से मेरे वृषाण टटोलती थी. मेरे हाथ उस की पीठ सहला रहे थे.

मैंने हस्ट मैथुन का मज़ा लिया था, आज एक बार छूट छोड़ने का मज़ा भी लिया. इन दोनो से अलग किसम का मज़ा आ रहा था लंड चूसवाने में. वो भी जलदी से एक्शसीते होती चली थी. उस के तुँक से लाड़बड़ लंड को मुँह से निकल कर वो मेरी जांघे पैर बेइत गयी अपनी जांघें चौड़ी कर के भोस को लंड पैर टिकया. लंड का मट्ता योनी के मुख में फसा की नितंब नीचा कर के पूरा लंड योनी में ले लिया. उस की मोन्स मेरी मोन्स से जुट गयी

‘उहहहहह, मज़ा आ अगया. मंगल, जवाब नहीं तेरे लंड का. जितना मीठा मुँह में लगता है इतना ही छूट में भी मीठा लगता है कहते हुए उस ने नितंब गोल घुमए और उपर नीचे कर के लंड को अंदर बाहर कर ने लगी आठ दस धक्के मार ते ही वो तक गयी और ढल पड़ी. मैंने उसे बात में लिया और घूम के उपर आ गया. उस ने टाँगें पसारी और पाँव अड्धार किया. पॉसीटिओं बदलते मेरा लंड पूरा योनी की गहराई में उतर गया. उस की योनी फट फट करने लगी

सिखाए बिना मैंने आधा लंड बाहर खींचा, ज़रा रुका और एक ज़ोरदार धक्के के साथ छूट में घुसेद दिया. मोन्स से मोन्स ज़ोर से टकराई. मेरे वृषाण गांड से टकराए. पूरा लंड योनी में उतर गया. ऐसे पाँच सात धक्के मारे. बसंती का बदन हिल पड़ा. वो बोली, ‘ऐसे, ऐसे, मंगल, ऐसे ही छोड़ो मुझे. मारो मेरी भोस को और फाड़ दो मेरी छूट को.’

भगवान ने लंड क्या बनाया है छूट मार ने के लिए कठोर और चिकना; भोस क्या बनाई है मार खाने के लिए घनी मोन्स और गद्दी जैसे बड़े होत के साथ. जवाब नहीं उन का. मैने बसंती का कहा माना. फ़्री स्टयले से तापा ठप्प में उस को छोड़ ने लगा. दस पंद्रह धक्के में वो ज़द पड़ी. मैंने पिस्तोनिंग चालू रक्खा. उस ने अपनी उंगली से क्लटोरिस को मसला और डूसरी बार ज़ड़ी. उस की योनी में इतने ज़ोर से संकोचन हुए की मेरा लंड डब गया, आते जाते लंड की टोपी उपर नीचे होती चली और मट्ता ओर टन कर फूल गया. मेरे से अब ज़्यादा बारदस्त नहीं हो सका. छूट की गहराई में लंड दबाए हुए में ज़ोर से ज़ड़ा. वीरय की चार पाँच पिचकारियाँ छ्छुथी और मेरे सारे बदन में ज़ुरज़ुरी फैल गयी में ढल पड़ा.

आगे क्या बतौँ ? उस रात के बाद रोज़ बसंती चली आती थी. हमें आधा एक घंटा समय मिलता था जब हम जाम कर छुड़ाई करते थे. उस ने मुझे काई टेचनक सिखाई और पॉसीटिओं दिखाई. मैंने सोचा था की काम से काम एक महीना तक बसंती को छोड़ ने का लुफ्ट मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक हपते में ही वो ससुराल वापस छाई गयी

असली खेल अब शुरू हुआ.

बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुच्छ नहीं हुआ. में हैर रोज़ उस की छूट याद कर के मूट मरता रहा. चौथे दिन में मेरे कमरे में पढ़ ने का प्रयत्न कर रहा था, एक हाथ में तटर लंड पकड़े हुए, और सुमन भाभी आ पहॉंची. ज़त पाट मैंने लंड छोड़ कपड़े सरीखे किया और सीधा बेइत गया. वो सब कुच्छ समाजति थी इस लिए मुस्कुराती हुई बोली, ‘कैसी चल रही है पढ़ाई, देवर्जी ? में कुच्छ मदद कर सकती हूँ ?’

भाभी, सब ठीक है मैंने कहा.

आँखों में शरारत भर के भाभी बोली, ‘पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रक्खा था जो मेरे आते ही तुम ने छोड़ दिया ?’

नहीं, कुच्छ नहीं, ये तो..ये में आगे बोल ना सका.

तो मेरा लंड था, यही ना ?’ उस ने पूच्छा.

वैसे भी सुमन मुझे अचची लगती थी और अब उस के मुँह से ‘लंड’ सुन कर में एक्शसीते होने लगा. शर्म से उन से नज़र नहीं मिला सका. कुच्छ बोला नहीं.

उस ने धीरे से कहा, ‘कोई बात नहीं. मे समाजति हूँ लेकिन ये बता, बसंती को छोड़ना कैसा रहा? पसंद आई उस की काली छूट ? याद आती होगी ना ?’

सुन के मेरे होश उड़ गाये सुमन को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता दिया होगा? मैंने इनकार करते हुए कहा, ‘क्या बात करती हो ? मैंने ऐसा वैसा कुच्छ नहीं किया है

‘अचच्ा ?’ वो मुस्कराती हुई बोली, ‘क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?’

‘वो यहाँ आई ही नहीं,’ मैंने डरते डरते कहा. सुमन मुस्कुराती रही.

‘तो ये बताओ की उस ने सूखे वीरय से आकदी हुई निक्केर दिखा के पूच्छा, निक्केर किस की है तेरे पलंग से जो मिली है ?’

में ज़रा जोश में आ गया और बोला, ‘ऐसा हो ही नहीं सकता, उस ने कभी निक्केर पहेनी ही में रंगे हाथ पकड़ा गया.

मैंने कहा, ‘भाभी, क्या बात है ? मैंने कुच्छ ग़लत किया है ?’

उस ने कहा,’वो तो तेरे भैया नाक़की करेंगे.’

भैया का नाम आते ही में दर गया. मैंने सुमन को गिदगिड़ा के बिनती की जो भैया को ये बात ना बताएँ. तब उस ने शर्त रक्खी और सारा भेद खोल दिया.

सुमन ने बताया की भैया के वीरय में शुक्राणु नहीं थे, भैया इस से अनजान थे. भैया तीनो भाभियों को अचची तरह छोड़ते थे और हैर वक़्त ढेर सारा वीरय भी छोड़ जाते थे. लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता. सुमन चाहती थी की भैया चुआटी शादी ना करें. वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी. इस के वास्ते दूर जाने की ज़रूर कहाँ थी, में जो मोज़ूड़ था ? सुमन ने तय किया की वो मुज़ से छुड़वाएगी और मा बनेगी.

अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का. में कहीं ना बोल दूं तो ? भैया को बता दूं तो ? मुझे इसी लिए बसंती की जाल में फासया गया था.

बयान सुन कर मैंने हास के कहा ‘भाभी, तुज़े इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी ? तू ने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो में तुज़े छोड़ने का इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त हो.’

उस का चहेरा लाल ला हो गया, वो बोली, ‘रहने भी दो, ज़ूते कहीं के. आए बड़े छोड़ने वाले. छोड़ ने के वास्ते लंड चाहिए और बसंती तो कहती थी की अभी तो तुमारी नुन्नी है उस को छूट का रास्ता मालूम नहीं था. सच्ची बात ना ?’

मैंने कहा, ‘दिखा दूं अभी नुन्नी है या लंड ?’

‘ना बाबा, ना. अभी नहीं. मुझे सब सावधानी से करना होगा. अब तू चुप रहेना, में ही मौक़ा मिलने पैर आ जौंगी और हम करेंगे की तेरी नुन्नी है

दोस्तो, दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गाये तीन दिन के लिए उन के जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई. में कुच्छ पूचछुन इस से पहले वो बोली, ‘कल रात तुमरे भैया ने मुझे तीन बार छोड़ा है सो आज में तुम से गर्भवती बन जाओउं तो किसी को शक नहीं पड़ेगा. और दिन में आने की वजह भी यही है की कोई शक ना करे.’

वो मुज़ से छिपक गयी और मुँह से मुँह लगा कर फ़्रेंच क़िसस कर ने लगी मैंने उस की पतली कमर पैर हाथ रख दिए मुँह खोल कर हम ने जीभ लड़ाई. मेरी जीभ होठों बीच ले कर वो चुस ने लगी मेरे हाथ सरकते हुए उस के नितंब पैर पहुँचे. भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उस की सारी और घाघारी उपर तरफ़ उठाने लगा. एक हाथ से वो मेरा लंड सहलाती रही. कुच्छ देर में मेरे हाथ उस के नंगे नितंब पैर फिसल ने लगे तो पाजामा की नदी खोल उस ने नंगा लांद मुट्ठि में ले लिया.

में उसको पलंग पर ले गया और मेरी गोद में बिताया. लंड मुट्ठि में पकड़े हुए उस ने फ़्रेंच क़िसस चालू रक्खी. मैंने ब्लौसे के हूक खोले और ब्रा उपर से स्तन दबाए. लंड छोड़ उस ने अपने आप ब्रा का हॉक खोल कर ब्रा उतर फेंकी. उस के नंगे स्तन मेरी हथेलिओं में समा गाये शंकु आकर के सुमन के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छ्होटे और कड़े थे. अरेओला भी छोटी सी थी जिस के बीच नोकदर निपपले लगी हुई थी. मैंने निपपले को छिपति में लिया तो सुमन बोल उठी, ‘ज़रा होले से. मेरी निपपलेस और क्लटोरिस बहुत सेंसीटिवे है उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती.’ उस के बाद मैंने निपपले मुँह में लिया और चूस.

में आप को बता दूं की सुमन भाभी कैसी थी. पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साथ किलो. बदन पतला और गोरा था. चहेरा लुंब गोल तोड़ा सा नरगिस जैसा. आँखें बड़ी बड़ी और काली. बल काले , रेशमी और लुंबे. सीने पैर छ्होटे छ्होटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से धके रखती थी. पेट बिल्कुल सपाट था. हाथ पाँव सूदोल थे. नितंब गोल और भारी थे. कमर पतली थी. वो जब हसती थी तब गालों में खड्ढे पड़ते थे.

मैंने स्तन पकड़े तो उस ने लंड थाम लिया और बोली, ‘देवर्जी, तुम तो तुमरे भीया जैसे बड़े हो गाये हो. वाकई ये तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लंड है और वो भी कितना तगड़ा ? हाय राम, अब ना तड़पाओ, जलदी करो.’

मैंने उसे लेता दिया. ख़ुद उस ने घाघरा उपर उठाया, जांघें छड़ी की और पाँव अड्धार लिए में उस की भोस देख के दंग रह गया. स्तन के माफ़िक सुमन की भोस भी चौदह साल की लड़की की भोस जितनी छोटी थी. फ़र्क इतना था की सुमन की मोन्स पैर काले ज़नट थे और क्लटोरिस लुंबी और मोटी थी. भीया का लंड वो कैसे ले पति थी ये मेरी समाज में आ ना सका. में उस की जांघों बीच आ गया. उस ने अपने हाथों से भोस के होत चौड़े पकड़ रक्खे तो मैंने लंड पकड़ कर सारी भोस पैर रग़ादा. उस के नितंब हिल ने लगे. अब की बार मुझे पता था की क्या करना है मैंने लंड का माता छूट के मुँह में घुसाया और लंड हाथ से छोड़ दिया. छूट ने लंड पकड़े रक्खा. हाथों के बल आगे ज़ुक कर मैंने मेरे हिप्स से ऐसा धक्का लगाया की सारा लंड छूट में उतर गया. मोन्स से मोन्स टकराई, लंड तमाक तुमक कर ने लगा और छूट में फटक फटक हो ने लगा.

में काफ़ी उत्तेजित हुआ था इसी लिए रुक सका नहीं. पूरा लंड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुमन को छोड़ ना शुरू किया. अपने छूटड़ उठा उठा के वो सहयोग देने लगी छूट में से और लंड में से चिकना पानी बहाने लगा. उस के मुँह से निकलती आााह जैसी आवाज़ और छूट की पूच्च पूच्च सी आवाज़ से कामरा भर गया.

पूरी बीस मिनिट तक मैंने सुमन भाभी की छूट मारी. दरमियाँ वो दो बार ज़ड़ी. आख़िर उस ने छूट ऐसी सीकुडी की अंदर बाहर आते जाते लंड की टोपी छाड़ उतर करने लगी मानो की छूट मूट मार रही हो. ये हरकट में बारदस्त नहीं कर सका, में ज़ोर से ज़रा. ज़र्रटे वक़्त मैंने लंड को छूट की गहराई में ज़ोर से दबा र्खा था और टोपी इतना ज़ोर से खीछी गयी थी की दो दिन तक लोडे में दर्द रहा. वीरय छोड़ के मैंने लंड निकाला, हालन की वो अभी भी ताना हुआ था. सुमन टाँगें उठाए लेती रही कोई दस मिनिट तक उस ने छूट से वीरय निकल ने ना दिया.

दोस्तो, क्या बतौँ ? उस दिन के बाद भैया आने तक हैर रोज़ सुमन मेरे से छुड़वाटी रही. नसीब का करना था की वो प्रेज्ञांत हो गयी फमिल्य में आनंद आनंद हो गया. सब ने सुमन भाभी को बढ़ाई दी. भाहिया सीना तां के मुच मरोड़ ते रहे. सविता भाभी और चंपा भाभी की हालत ओर बिगड़ गयी इतना अचच्ा था की प्रेज्नांस्य के बहाने सुमन ने छुड़वा ना माना कर दिया था, भैया के पास डूसरी दो नो को छोड़े सिवा कोई चारा ना था.

जिस दिन भैया सुमन भाभी को डॉकटोर के पास ले आए उसी दिन शाम वो मेरे पास आई. गभड़ती हुई वो बोली, ‘मंगल, मुझे दर है की सविता और चंपा को शक पड़ता है हमारे बारे में.’

सुन कर मुझे पसीना आ गया. भैया जान जाय तो आवश्य हम दोनो को जान से मार डाले. मैंने पूच्छा, ‘क्या करेंगे अब ?’

‘एक ही रास्ता है वो सोच के बोली.

रास्ता है?’

‘तुज़े उन दोनो को भी छोड़ना पड़ेगा. छोड़ेगा?’

‘भाभी, तुज़े छोड़ ने बाद डूसरी को छोड़ ने का दिल नहीं होता. लेकिन क्या करें ? तू जो कहे वैसा में करूँगा.’ मैंने बाज़ी सुमन के हाथों छोड़ दी.

सुमन ने प्लान बनाया. रात को जिस भाभी को भैया छोड़े वो भही दूसरे दिन मेरे पास चली आए. किसी को शक ना पड़े इस लिए तीनो एक साथ महेमन वाले घर आए लेकिन में छोदुं एक को ही.

थोड़े दिन बाद चंपा भाभी की बारी आई. महवरी आए तेरह डिनहुए थे. सुमन और सविता दूसरे कमरे में बही और चंपा मेरे कमरे में चली आई.

आते ही उस ने कपड़े निकल ना शुरू किया. मैंने कहा, ‘भाभी, ये मुझे करने दे.’ आलिनगान में ले कर मैंने फ़्रेंच किस किया तो वो तड़प उठी. समय की परवाह किए बिना मैंने उसे ख़ूब चूमा. उस का बदन ढीला पद गया. मैंने उसे पलंग पैर लेता दिया और होले होले सब कपड़े उतर दिए मेरा मुँह एक निपपले पैर छोंत गया, एक हाथ स्तन दबाने लगा, दूसरा क्लटोरिस के साथ खेलने लगा. थोड़ी ही देर में वो गरम हो गयी

उस ने ख़ुद टांगे उठाई और चौड़ी पकड़ रक्खी. में बीच में आ गया. एक दो बार भोस की दरार में लंड का मट्ता रग़ादा तो चंपा के नितंब डोलने लगे. इतना हो ने पैर भी उस ने शर्म से अपनी आँखें पैर हाथ रक्खे हुए थे. ज़्यादा देर किए बीन्सा मैंने लंड पकड़ कर छूट पैर टिकया और होले से अंदर डाला. चंपा की छूट सुमन की छूट जितनी सीकुडी हुई ना थी लेकिन काफ़ी तिघ्ट थी और लंड पैर उस की अचची पकड़ थी. मैंने धीरे धक्के से चंपा को आधे घंटे तक छोड़ा. इस के दौरान वो दो बार ज़ड़ी. मैंने धक्के किर आफ़्तर बधाई तोचंपा मुज़ से लिपट गयी और मेरे साथ साथ ज़ोर से ज़ड़ी. ताकि हुई वो पलंग पैर लेती रही, मेईन कपड़े पहन कर खेतों मे चला गया.

दूसरे दिन सुमन अकेली आई कहने लगी ‘कल की तेरी छुड़ाई से चंपा बहुत ख़ुश है उस ने कहा है की जब चाहे मे समाज गया.

अपनी बारी के लिए सविता को पंद्रह दिन रह देखनी पड़ी. आख़िर वो दिन आ भी गया. सविता को मैंने हमेशा मा के रूप में देखा था इस लिए उस की छुड़ाई का ख़याल मुझे अचच्ा नहीं लगता था. लेकिन दूसरा चारा कहाँ था ?

हम अकेले होते ही सविता ने आँखें मूँद ली. मेरा मुँह स्तन पैर छिपक गया. मुझे बाद में पता चला की सविता की चाबी उस के स्तन थे. इस तरफ़ मैंने स्तन चूसाना शुरू किया तो उस तरफ़ उस की भस ने काम रस का फ़ावरा छोड़ दिया. मेरा लंड कुच्छ आधा ताना था.और ज़्यादा अकदने की गुंजाइश ना थी. लंड छूट में आसानी से घुस ना सका. हाथ से पकड़ कर धकेल कर मट्ता छूट में पैठा की सविता ने छूट सिकोडी. तुमका लगा कर लंड ने जवाब दिया. इस तरह का प्रेमलप लंड छूट के बीच होता रहा और लंड ज़्यादा से ज़्यादा अकदता रहा. आख़िर जब वो पूरा टन गया तब मैंने सविता के पाँव मेरे कंधे पैर लिए और लंबे तल्ले से उसे छोड़ने लगा. सविता की छूट इतनी तिघ्ट नहीं थी लेकिन संकोचन कर के लंड को दबाने की त्रिक्क सविता अचची तरह जानती थी. बीस मिनुटे की छुड़ाई में वो दो बार ज़ड़ी. मैंने भी पिचकारी छोड़ दी और उतरा.

दूसरे दिन सुमन वही संदेशा लाई जो की चंपा ने भेजा था. तीनो भाभिओं ने मुझे छोड़ने का इज़ारा दे दिया था.

अब तीन भाभिओं और चौथा में, हम में एक समजौता हुआ की कोई ये राज़ खोलेगा नहीं. सुमन ने भैया से चुदवाना बंद किया था लेकिन मुज़ से नहीं. एक के बाद एक ऐसे में तीनो को छोड़ता रहा. भगवान कृपा से दूसरी दोनो भी प्रेज्ञांत हो गयी भैया के आनंद की सीमा ना रही.

समय आने पर सुमन और सविता ने लड़कों को जन्म दिया तो चंपा ने लड़की को. भैया ने बड़ी दावत दी और सारे गाओं में मिठाई बाँटी. अचच्ा था की कोई मुझे याद करता नहीं था. भाभीयो की सेवा में बसंती भी आ गयी थी और हमारी रेगूलर छुड़ाई चल रही थी. मैंने शादी ना करने का निश्चय कर लिया.

सब का संसार आनंद से चलता है लेकिन मेरे वास्ते एक बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है भैया सब बच्चों को बड़े प्यार से रखते है लेकिन कभी कभी वो जब उन से मार पीट करते है तब मेरा ख़ून उबल जाता है और मुझे सहन करना मुश्किल हो जाता है दिल करता है की उस के हाथ पकड़ लूं और बोलूं, ‘रह ने दो, ख़बरदार मेरे बच्चे को हाथ लगाया तो.’

ऐसा बोलने की हिम्मत अब तक मैंने जुट नहीं पाई.
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THE DARK SIDE SAGA-sexy story

Thursday, 31 March 2016 | 0 comments

THE DARK SIDE SAGA-sexy story

zindagi bhi ajeeb hoti hai kab kaise mod le aati hai hum kabhi kalpna bhi nahi kar sakte hai. kuch aisi hi meri kahani hai main kabhi aisa nahi banna chahta tha par ek cheez hoti hai taqdeer jispe hamara koi bas nahi chalta hai.yeh sab achank hi suru hota gaya shuruat me bahut hi accha lagta tha par aaj jab piche mudkar dekhta hu toajeeb sa lagta hai.khair aapko batata hu ke kaise ye sab shuru hua.


Mera naam $$$$ hai. Main ek gaanv me rehta hu us samay meri umar to kuch khas nahi thi par vcr pe bluefilm or sexy kahaniyo wali kitab padh kar thoda jaldi hi jawani ki or kadam badha diye the.ye kahani shuru huvi jab mai apni bhabhi yani mere tauji ke bête ki wife ke parti aakrshit hone laga unka naam anita tha


23-24 ki hogi us time pe wo kafi hansi-majak bhi karti rehti thi. main naya naya jawan hua tha to dil me choot marne ki kasak lagi rehti thi. Dheere Dheere anita bhabhi mujhse khulne lagi hum kai der baatien karte rehte the aur din kat rahe the Par eak din lagbhag 11 baje ke aaspass main apni chhat par gaya to achanak maine dekha ki .........................................

anita apne aangan me naha rahi hai mere to hosh hi udd gaye!usko dekh kar aap samajh sakte hain ki gaanv mee log aise hi nahate hai bathroom vagera ka chalan ganvo me thoda kam hi hota hain,pani me bheega hua uska gora badan
dekh kar meri to sitti pitti hi gum ho gayi zindagi me pehli baat kisi aurat to aisa dekha tha

bus ek kale rang ki kachhi hi uske badan pe thi uski badi badi choochiyaaa dekh kar mera to dimag hi kharab hogaya achanak hi uski nazar mujh pe padi to wo meri or dekhkar muskurai par main turant hi neeche bhag gaya. Bus mere dimag meuska madak badan hi ghoom raha tha shaam ko main uske ghar pe gaya to wo akeli hi thi hum baat karne lage phir

achanak se usne pucha ki dophar ko kya dekh rahe the ? maine usko bataya ki kaise wo sab ho gaya. phir wo hasne lagi tabhi mere dimag me ek film ka diloge aaya ke hasi to phasi na jane mujhe kya hua maine usko pakad liya aur uske gulabi honto ko apne honto me daba liya aur chusne laga wo ekdam se piche hui aur meri aur dekhne lagi


maine bina der kiye usko I love You bol diya aur dobara apni bahon me bharne ki koshish ki parantu usne kaha ki wo soch ke bataye gi aur mujhe jane ko kaha kyonki uski saas aane wali thi khair agle dino kuch khass nahi hua main soch raha tha ki kab usko chodu.................


5-6 din baad anita ki saas hamare garh aayi aur batane lagi ki wo aur uske pati khatu shamji ke darshan karne ke liye jaa rahe hai ek hafte ke liye agle din wo chale gaye.

ab main jugad me tha ki kaise anita bhabhi ko chodu par baat nahi ban rahi thi.shaam ko hum aise hi baithe the to uske pati ravi ne jikar kiya ki usko kaam
ke silsile me bahar jana padega kuch dino ke liye par garh pe koi nahi hai to wo kaise jaye to

papa bole ki wo jaye aur garh ki taraf se be fikar rahe.agli subah ravi kaam pe nikal gaya shaam ko papa ne mujhe bulaya aur kaha ki jab tak ravi ya uske ma-baba nahi aa jate mujhe unke garh pe hi sona hai aur bhabhi ki madad bhi karni
hai

kano me main to ye sunke mast ho gaya par uper se aisa show kiya ki meri koi iccha nahi hai unke garh jaane ki. khair dheere dheere sham hui aur main unke garh ki aur chal diya ...................................



Mujhe dekh kar bhabhi haste hue boli ki aa gaye phir humne chai pi aur batein karne lag gaye. lagbhag 9 baje humne sone ki taiyari ki unhone meri khat apne palang ke pass hi bicha di main lete lete usko chodne ka sochne laga

bhabhi ghaghre choli me bahot hi madak lag rahi thi jabki wo ganv me ek normal dress hi hoti hai.Mujhse control nahi ho raha tha akhir maine faisla kiya aur bhabhi ke palang pe ja ke baith gaya aur unka haath pakad liya bhabhi uth kar mere pass baith gayi aur boli "kya baat hai neend nai aa rahi kya"

maine kaha ,"bhabhi mujhe kuch ho raha hai main apne ko control nahi kar pa raha hu"to bhabhi boli ke main kya madad karu tumhari itna sunte hi maine us se lipat gaya aur unke galo ki pappi le li thodi der main unse lipta raha phir maine unke honto ko chusna shuru kiya pata nahi kitni der main kiss karta raha phir unhone kiss toda aur meri or dekhne lagi

maine dubara kiss karna shuru kiya aur dhire se apne haath unki peeth par pherta raha ab bhabhi ki saanse ukhdne lagi thi mere hath unki golmatol sudol chatiyon pe pahunch gaye the jaise hi maine unki choochiyo ko halka sa dabaya bhabhi ne mera hath pakad liya


par maine kaha "bhabhi aaj mat roko aaj bus jo hota hai ho jane do" to wo boli agar kisi ko malum ho gaya to maine kaha chinta mat karo abhi bas in lamho me kho jao aur mere hath unki choochiyo par kas gaye unke muh se ek halki si siskari nikal gayi jis se main aur uttejit ho gaya

maine bhabhi ki choli ko khol diya aur bra ke upar se hi unko masalne laga phi maine bra ko bhi utar diya aur ek choochi ko apne muh me bhar kar chusne laga aur dusri ko apne hath se masalne laga jaise jaise bhabhi ki nippal ko chosta gaya unke muh se uffffffffffffffffffffffffffffff hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii jaisi aawaje halke halke nikalne lagi

main bari bari se dono chuchiyo ko pita raha ab bhabhi ki aankho me khumari chane lagi thi maine bhabhi ko khada kiya aur unke ghagre ka nada kheench diya jaise hi wo niche gira meri annkhe khushi se chamak uthi unhone kachhi nahi pehni thi

wo purn roop se nangi mere samne khadi thi sharam se unki annkhe band ho gayi aur meri nazrien to unki choot se hi nahi hath rahi thi kale kale balon se dhaki hui hali laal laal si chhot ko dekh kar mera lund jo pehle se hi jor mar raha tha aur bekabu ho gaya bhabhi boli light band kardo muhje sharam aa rahi hai

par maine mana kiya ki bhabhi aaj is husn ke darshan karne ka mauka aaya hai aur aap light ko band karne ke liye keh rahi ho.ab rukna mushkil tha maine apne kacche ko chod kar sare kapde utar diye aur bhabhi ko apni godi me bitha liya aur unko kiss karne laga

mere hath unkee chutado par pahuch gaye aur main unhe sehlane lagaa mera lund unke chutado ki darar par mehsus ho raha tha wo masti me aa chuki thi ab maine bhabhi ko lita diya aur unke badan ko chumna shuru kar diya bhabhi ki pappi lete lete maine ek haath unki choot pe rakh diya aur usko sehlane laga jaise hi meri ungliyaa unki jhanto se takayi unki aankhe masti se bojhil hone lagi

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aur unke muh se larajti hui awaz boli ke ye kya kar diya jalim thoda dheere yeh sunke mujhe thoda josh aa gaya aur maine unki tango ko chodi kiya aur ab choot puri tarah se mere samne thi choti si balo se dhaki choot mujhe bahut hi pyari lag rahi thi

ji me aaya ke ek hi jhatke me land gusa du par main is raat ko yaadgar banana chahta tha maine apna muh unki gadrayi choot pe rakh diya aur usko apne muh me bhar liya jaise hi maine aisa kiya bhabhi ki siskariyo se kamra goonj utha kyonki garh me hamare alava aur koi nahi tha to wo bhi thoda khulke maidan me utar aayi thi

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unki ungliyo se mere land ka sanvedanshil bhag shelayejane se mere sharir pe kampkampi chad gayi yeh dekh ke bhabhi hasne lagi aur boli kabhi yeh addhe raste me hi dam no tod de maine kaha aajma le meri rani aur unko apne land pe jhuka diya bhabhi neeche baith gayi aur mere land ke supade pe abhi jeebh pherne lagi

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bhabhi ne apni janghe meri kamar ke pe lipta di aur boli shabash aise hi lage raho tabhi unka badan phir ainth gaya aur choot ki chicknai andar se badh gayi main samaj gaya ki wo charm sukh ki or badh gayi hai

usi pal mujhe mere sharir me tanav mehsus hua laga sare sharir ka khoon ek jagah jama ho gaya hai aur bhabhi ke madak badan se chipkte huye mene apna virya unki choot me chod diya aur unke upar lete lete hi hafne laga wo meri or dekh ke muskurai aur mere hoto ko choom liya
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साली साहेबान बीवी मेहरबान-Hindi Sexy Story

Thursday, 24 March 2016 | 0 comments


अच्छी खासी पढाई करने के बाद घर वालो ने एक खूबसूरत हसींना से मेरी सादी भी करवा दी मुझे जॉब दिल्ही में लगी थी जिसकी वजह से मुझे अपनी बीवी को लेकर अपने माँ बाप से दूर जाना पड़ा पहले तो अच्छा नहीं लगा मगर धीरे धीरे सब सेट हो गया में एक कंप्यूटर इंजीनियर हु
मेरी बीवी पायल
 
भरा हुआ बदन हे हमेशा मोर्डेन विचार रखती हैं मुझसे प्यार भी बहुत करती हैं और बदकिस्मती से मेरी जॉब इसके मायके (डेल्ही)में ही लगी थी
घर भी उनके घर से नजदीक ही था बस 1-2 किलोमीटर का फसला था पायल की दो बहने हे एक उससे बड़ी और एक उससे छोटी 
 

पायल की बड़ी बहन स्नेहा जिसका बदन तो पायल से भी ज्यादा गदराया हुआ हैं हा पायल जितनी मस्तीखोर नहो हे समज दार हे .. फिर भी नजाने क्यों अभी तक अपने सपनो का राज कुमार ढूंढ रही हे हमेसा पुरे कपड़ो में रहती हे साडी पहनती हे और कॉलेज में प्रोफेशर हे

पायल की छोटी बहन अंजलि
मशाल्ला क्या बदन हे बिलकुल पतली और गोरी चीटी भले ही उसकी छाती के उभर अभी कम थे मगर उसे भी एक सेक्सी माल कहा जा सकता हे सबसे सरार्ति भी तो यही थी .. अभी कॉलेज में पढाई कर रही हे 
थक हार कर जब में घर पर पोहचा
मेरे ससुर जी सोफे पर बेठे हुई चाय की चुस्की ले रहे थे मम्मीजी और दोनों सालिया किचन में थी पायल की मदद कर रही थी
मुझे अंदर आता हुआ देख कर ससुर जी खड़े हो गये
" अरे दामाद जी आइये आइए "
मेरे ही घर में मुझे कह रहे हे जेसे में मेहमान बन कर आया हु
पायल के घर वाले अक्षर वीक में 1-2 बार आया करते थे इसलिए अब इन सब की आदत लग गयी थी

में अपनी बेग सोफे पर फेंकते हुए सोफे पर गिर गया पसीने से भीग चूका था

तभी मेरी साली अंजलि ने मुझे देख लिया वो उछालते हुए मेरे पास आकर बेथ गयी और आस पास कुछ ढूंढने लगी

" क्या ढूंढ रही हो अंजलि " मेने बड़ी व्याकुलता से उसे पूछा

" आप मेरे लिए कुछ भी गिफ्ट नहीं लाये " उसने चिंतित स्वर में कहा उसका चेहरा उदास सा हो गया मगर उदास चेहरे में वो पहले से ज्यादा खूब सूरत लग रही थी

मेने भी हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा " अरे पगली आज ऑफिस का पहला दिन था .. आज पहली सेलरी नही मिलने वाली थी जो तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आवु " 
सामने बेठे पापाजी हम दोनों को गुरे जा रहे थे
" आप सबसे बुरे जीजू हो .. हह " अपना चेहरा बिगड़ते हुए अंजलि दूसरी तरफ मुद कर बेथ गयी

अब सामने पापा जी गुर रहे थे मिजे तो फिलहाल चुप रहना ही ठीक लगा

कुछ देर ऐसे ही बेठी रही ..

पापाजी को किसी का फ़ोन आया वो वाट करते करते बहार चले गए

मेने तुरंत उसे अपनी तरफ किया
" अरे बाबा अब माफ़ भी करदो ना ... बोलो क्या सजा दोगी " मेने अपने दोनों हाथ उसके गाल पर रखते हुए कहा

" में जो कहूँगी वो करना पड़ेगा "थोडा नखरे दिखाते हुए उसने कहा

" अरे इसा कभी हुआ हे की हमारे साली साहेबा कुछ कहे और हम ना करे " मेने भी मस्ती भरे स्वर में कहा

" आपको कल मुझे मूवी लेजाना पड़ेगा " उसने मेरे कान में आकर धीरे से कहा

" क्या ... '' मेरी तो फट के हाथ में आ गयी थी
ऑफिस का दूसरा दिन और छूटी लेनी पदेगी

" देखो अंजलि मेरा कल दूसरा दिन हे मुझे छूटी नहीं मिलेगि और हम दोनों अकेले जायेगे तो घर वाले क्या सोचेगे " मेने थोडा चिंतित होते हुए कहा

" वो सब मुझे नहीं पता आप को बस मुझे कल मूवी ले जाना हे " उसके मुह पर हल्का सा गुस्सा था

" ओके शाम को 9-12 के सो में चलेगा " मेने सुजाव देते हुए कहा

" मगर में घर पर क्या कहूँगी रात को कहा जा राही हु " उसके चेहरे पर टेंशन की लकीरे साफ़ नजर आ रही थी

" ओफ़ोफो तुम भी ना ... कह देना तुम्हारे फ्रेंड की बिर्थ पार्टी हे .. में मीटिंग का बहना बना लूंगा " मेरे चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी

अंजलि के हसीं मुखड़े पे भी हँसी की लहर दौड़ गयी वो भी भागति हुई किचन में चली गयी

में फिर से सोफे पर निढाल हो गया तभी पायल अपने हाथ में चाय का कप लकर मेरी तरफ आने लगी

टेबल पर चाय का कप रख कर अपने दुप्पटे से मेरे चेहरे पर लगी पसीने की बूंदों को साफ़ करने लगी

" उफ़फ़फ़फ़ पायल तुम कितनी केअर करती हो मेरी " मेरे दिल में पायल के लिए बना हुआ प्यार बहार आ रहा था

" आप भी तो मेरी केअर रखते हो " उसने कुछ ज्यादा ही मस्ती में कहा वो सेक्स की बात कर रही थी जिसे में समज चूका था

में मंद मंद मुस्कुराने लगा

फिर पायल उठ कर किचन में चली गयी
फिर कुछ ही पल में खाना रेडी हो गया हम सब ने खाना खाया फिर वो लोग अपने घर चले गये

में भी बेडरूम में चला गया और पायल के आने का इंतज़ार करने लगा
 
में बेशब्री से पायल के लोटने का इंतजार कर रहा था पलंग पर लेटे हुए बस अपनी सासु माँ और दोनों सा1लिओ के बारेमे ही सोच सोच कर मेरा लंड अकड़ने लगा था में बार बार उसे पेंट के ऊपर से सेट कर रहा था तभी मेरी आँखे चमक गयी जब मेने अपने सामने अपनी बीवी पायल को देखा क्या खूब लग रही थी वो
ऊपर एक टीशर्ट पहनी हुई थी और निचे केप्री में थी और बिना ब्रा में उसके गदराये हुए मुम्मे मेरे लंड की हालत बिगाड़ रहे थे मेने एक बार फिर से अपने लंड को पेंट के ऊपर से सेट किया जिसे देख कर पायल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था में खड़ा हो गया और मेरे बढ़ते कदम मेरी बीवी पायल की और बढ़ रहे थे जो ईश समय दरवाज़े पर खड़ी थी और कातिल मुस्कान दे रही थी में कुछ ही पलो में उसके साथ खड़ा था ..हम दोनों एक दूसरे की आँखों में खो गए थे मेरे हाथ उसके गालो को सहला रहे थे मेने अपना मुह आगे बढ़ाया और इसके रसीले होठो पर अपने होठ रख दिए में अपने हाथ उसके बालो में सहला रहा था और पगलो की तरह उसे चूमे जा रहा था अब धीरे धीरे वो भी मेरा साथ दे रही थी मेने उसकी टीशर्ट को ऊपर खिसकाया और उसके दोनों मुम्मो के ऊपर टांग दिया
अबी उसके रसगुल्लों जेसे बड़े बड़े गोल मटोल मुमे मेरे सामने थे सफ़ेद मुम्मो पर उसका काला निपल वातावरण को और भी गरम कर रहा था मेने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसके निपल को ऊँगली और अंगूठो के बिच दबा दिया उसके सरीर में करंट सा फेल गया हलकी सी सिसकी उसके मादक मुह में से निकल गयी मेने आगे बढ़ते हुए उसके गदराये हुए मुम्मो को अपने मुह में भर लिया और चूसने लगा अब तो वो जेसे पागल ही हो गयी ही मेरे सर को पकड़ कर उसके मुम्मो पर दबा रही थी और अपने सरीर को हिला रही थी
आह्ह्ह्ह्ह् चूसो आयुष चुसो म्मम्मम्मम्म
उसके इस आवाज़ को सुन कर मुज में अजीब सी ताकत आ गयी में और जोरो से उसके निप्पल को चूसने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा मेने अपना दूसरा हाथ आगे लेजाकर उसकी गरम चूत पे रख दिया जहा पर गीलापन और गरमाहट साफ़ महसूस हो रही थी मेने उसकी चूत पर हाथ रख कर उसे मसल दिया जिसकी वजह से पायल और भी उत्तेजित हो गयी और पागलो की तरह मुझे चूमने लगी और गुटनो के बल बेठ गयी उसने मेरे जीन्स का बटन खोलते हुए उसे और अंडरवेर को निचे खिसका दिया जिसकी वजह से मेरा 8 इंच का लंबा लंड हवा में जुलने लगा

पायल की आँखों में चमक सी आ गयी थी वो अपने आप को रोक नहीं सकी और उसके हाथ अपने आप मेरे खड़े हुए लंड पर आ पहुचे थे थोडा थूक लगते हुए उसने मेरे लंड को सहलाना सुरु कर दिया और मेरी गोलियों से भी खेलने लगी गुप्प्पप्पप्प करते हुए उसने मेरे लंड को एक ही झट्के में पूरा अपने मुह में भर लिया मेरे तना हुआ लंड उसके गले तक साफ़ महसूस हो रहा था
जिसकी वजह से उसको साँस लेने में भी तकलीफ हो रही थी मगर अभी तो वो वासना की प्यास में डूबी हुई थी उसने मेरे लंड को चूसना सुरु कर दिया 

पायल की चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी मेने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसकी चूत पर रख दिया उसकी टाइट चूत पे मेरा गरम हाथ पड़ते ही वो मचल सी गयी उसके सरीर में करंट सा छा गया मेने उसे अपनी गॉद में बिठा दिया और पलंग पर पटक दिया मेने उसकी दोनो टांगो को अपनी बहो में लिया और अपना मुह उसकी कमसिन चूत पर रख दिया उसके मुह से हलकी सी अह्ह्ह निकल गयी उसने मेरे सर को अपनी चूत पे दबा दिया और सिसकिया भर ने लगी में कुत्ते की तरह अपनि जीभ फड़फड़ाता हुआ उसकी चूत को बेरहमी से चाटे जा रहा था उसकी मादक सुगंध मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी मेरी गति धीरे धीरे बढ़ रही थी और पायल की सिसकिया तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी में खड़ा हुआ और उसकी रसीली चूत पे अपना लंड रख दिया थोड़ी बहुत थूक लगा कर मेने अपने लंड को धक्का दया और मेरा आधे से ज्यादा लंड पायल की चूत में चला गया वो मचल सी गयी स्स्स्स्स् अह्ह्ह्ह्ह एक सिसकी निकल गयी मेने एक और धक्का दिया और मेरा तूफानी लंड पायल की चूत की गहराइयो को चीरता हुआ उसकी चूत मे जा गुसा थोड़ी देर रुक कर एक बार फिर मेने उसकी चूत में से लंड निकल कर पूरा अंदर गुसा दिया अह्ह्ह्ह स्स्स्स आयुस वो कराह उठी उसकी चूत की गहराई में मेरा तूफानी लंड रग रग में महसूस हो रहा था
मेने उसकी गदराई हुई मुम्मो को पकड़ा और तेज़ी से अपने लंड को उसकी चूत की गहराइयो में धकेलने लगा बड़ी तेज़ी से धक्के लगाने लगा थोड़ी देर बाद उसको खड़ा किया और में बीएड पर लेट गया और बो मेरे लंड पर उछालने लगी फच फच की आवाज़ गूंजने लगी उसके मुम्मे बुरी तरह हवा में लहराने लगे ...
मेने एकदम से अपनी तेजी बढाई और तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा आह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह् ओह्ह्ह्हझह स्स्स मर गयी आयुष आआआअह्हह्हह्ह कराहते हुए बड़ी मस्ती से वो मेरे लंड पर उछाल भर रही थी थोड़ी देर बाद मेने उसे गोडी बना दिया और उसकी कमर पकड़ कर पागलो की तरह उसे चोदने लगा उसका बुरा हाल था अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उसके आँखों मेसे आंसू निकल औए थे और रोते हुए चिल्ला रही थी आआआआआह्हह्हह्हह्ह उसकी चूत से खून निकालने की सुरुआत हो चुकी थी मेने उसको करीब 15 मिनिट तक चोदा और फिर जड़ गया और निढाल होकर उसकी पीठ पर लेट गया और नजाने कब हम दोनो की आँख लग गया पता ही नही चला
सुबह जल्दी उठ कर ऑफिस के लिए निकल गया मगर लंड तो मेरा मेरी साली अंजलि के बारे में सोच सोच कर उछाल भर रहा था..फिर भी ऑफिस पोहचा पूरा दिन बस अपनी साली के बारे में ही सोचता रहा मन ही नही लगा काम में ..बस जेसे तैसे करके 7 बजे ऑफिस से जल्दी अपने ससुराल वालो के घर चला गया ...वेसे भी अंजलि ने कहा था की टिकट का इंतेज़ाम वो खुद करेगी इसलिए टिकट की टेंसशन तो थी नहीं मगर अंदर ही अंदर मन मरा जा रहा था ये जान्ने के लिए की कोनसी फ़िल्म देखने चलना हे ..कुछ ही पल में में अपने ससुराल वालो के घर पर था बेल बजायी और दरवाज़ा खुलते ही मेरी आँखे चमक गयी .वहा अंजलि कड़ी थी लाल स्लीव लेस टीशर्ट में उसके गदराये हुए मुम्मे क़यामत लग रहे थे में तो बस उसकी बड़ी क्लेवेज को ही गुरे जा रहा था ..उस्के उभर भले ही छोटे थे मगर कमाल के थे ..उसने मेरी नजर का पीछा करते हुए पाया की में कहा गुर हु ....उसने अपनी आँखों में गुस्सा दिखाते हुए अपनी आँखे छोटी क्र दी और अपना एक हाथ अपनी कमर पर रखते हुए कहा" जिजूऊऊऊऊ...."

में अचानक होश में आया और मस्ती भरे अंदाज़ में कहने लगा " अब अपने जीजू को अंदर भी नही बुलाओगी क्या " मगर न जाने उसने तो कसम खा रखी हो वह से ना हटने की ...उसके हाथ अभी भी उसकी कमर पर थे जिसकी वजह से मेरी आँखो ने उसकी गोरी बगल पे तेर रहे बड़े बालो को देख लिया था ...में एक कुत्ते की तरह अपनी जीभ में से लार टपका रहा था ..मेरे पेंट में भी हलचल ..अरे हलचल क्या पूरा तूफान उठा हुआ था ...में अपनी आँखों से उसे चोदे जा रहा था और वो अपनी आँखों से मेरे ऊपर आग उगल रही थी ..तभी पीछे से आवाज़ आई "अरे दामाद जी आप कब आये " उन्होंने दरवाज़े की तरफ आते हुए कहा ..मगर तब तक उनकी सहज़ादि बुरा मान कर अपने कमरेे में चली गयी
"अरे इसे क्या हो गया अब ...." इतना कहते हुए सासु माँ दरवाज़े पे खड़े खड़े उसी को जाते हुए देखने लगी
" अरे आप आइये "
मेने अंदर जाकर मेंन हॉल में सोफे पर बेथ गया..और इंतज़ार करने लगा की कब हमारी साली साहेबा आएगी ..दूसरी तरफ मेरे साफ मना करने के बावजूद मेरी प्यारी सासुमा चाय बनाने चली गयी .अब मेने सामने पड़ा रिमोट उठा कर टीवी देखने लगा इंटरेस्टिंग मैच चल रहा था ..तभी घर का मेन गेट खुला और मेरी नजर अपने आप उधर चली गयी नजारा ही कुछ इसा था .. ब्लैक कलर की साडी में मेरी बड़ी साली स्नेहा दरवाज़ा बन्ध करने की कोशिश कर रही थी ...क्यों की उसके दोनों हाथो में कलाज के प्रोजेक्ट का सामान था उसे दरवाज़ा बन्ध करने में दिक्कत हो रही थी...वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी ...उसकी मखमली गांड ने पहले से ही मेरे लंड मेंे हलचल करवा दी थी...में उठा और उसकी मदद के लिए दरवाज़े तक पोहच गया ..मेने उसके कोमल हाथ पर अपना हाथ रख दिया ..उसने मुझे गरते हुए कातिल स्माइल दी " अरे स्नेहा जी लाइए में उठा लेता हु "
वो भी बड़बड़ाई
" अरे अरे में कर लुंगी "
(वेसे भी आपको देख कर मेरा उठ ही जाता हैं ..सामान तो आपका भी उठाना हे मगर अभी देर हे..क्यों की उसके यहा देर हे अंधेर नही ) मन में मेने सोचा

फिर स्नेहा के मना करने पर भी मेंने उस सामान को उठा कर हॉल के बिच रखे टेबल पर रख दिया

और वो सोफे पर बैठ गयी और अपने साडी के पल्लू से अपने चेहरे के पसीने को पोछने लगि..थकान की वजह से उसकी फूली हुई छुचिया ऊपर नीचे हो रही थी ..

जिसे देख कर मेरा कबूतर फड़फड़ा ने लगा था और बड़ा सा तम्बू बांध लिया था जिसे स्नेहा की आखो से बचा पाना मुश्किल था

पसीना पोछते पोछते उसकी नजर मेरे लंड पर आकर रुक गयी और आँखे भी बड़ी हो गयी

" वेसे आपका सामान बहुत भारी हे "
" आयुश ये तुम क्या बोल रहे हो " वो मुज से बड़ी थी इसलिये नाम से ही बुलाया करती थी

अब मेरी तो फट गयी थी इस लंड ने मरवा दिया आज मुझे तो लगा आज मार खा कर ही घर जाउगा

" अरे म ...म..मेरे मतलव ये कोलेज का सामान ..."

तभी सीडिया कूद टी हुई अंजलि आई और कहने लगी
" जीजू चले "
मेरी तो किस्मत खुल गयी मेने सोचा चलो बच गया पहली बार सही टाइम पर आई हे ये
अरे वाह क्या लग रही थी ऊपर टॉप था नेट वाला और नीचे मिनी स्कर्ट ..जो बडी मुश्किल से उसकी जांग को ढक रहा था
हल्का सा मेकअप
अंजलि को ऐसे कपड़ो में देख कर
" अरे अंजलि कहा जा रही हो तुम रात के 8:3० बजे "स्नेहां की आखो में गुस्सा साफ झलक रहा था
अंजलि तो हमेशा से डरति थी स्नेहा से वो तो गभरा गयी और हड़बड़ाने लगी

असल में उसका प्लान था की दीदी के आने से पहले निकल जाना मगर मुझसे नाराज होने के चककर में वो खुद का ही नुकशान कर बेठी थी

"अरे अरे आप भी हमेशा डराति रहती हैं बिचारी को ..." मोके पर चोका लगते हुए मेने अंजलि को एक साइड से गले लगा लिया जिसकी वजह से उसकी नंगी बगल मेरे हाथ को टच कर रही थी

मेरी ये हरकत देख कर तो स्नेहा सुलग सी गयी
" अंजलि अपने कमरे में जाओ कहि नही जा रही तुम " स्नेहा ने गुस्से में कहा
"बट दीदी मेरी पक्की सहेली की बर्थडे हे नही जाउगी तो उसे बुरा लगेगा" अंजलि ने कांपते होठो से कहा वो अब भी मेरी बहो में थी

" चुप चाप अपने कमरे में जाओ " स्नेहा सोफे पे से खड़ी हो कर आग उबलने लगी
स्नेहा की इस हरकत से अंजलि का पूरा बदन काँप उठा और हड़बड़ाते हुए उसने मुझे कस के गले लगा लिया

" ये क्या कर रही हैं आप ....देख रही हे कितना डर रही हे ..इसका उसकी पढ़ाई पर क्या असर होगा पता हे आपको " में भी फूल मूड में था

" पढाई .. हे हे .. कॉलेज में देखती हु ना में की किस तरह लड़को से चिपक कर पढ़ाई करती हे ये ...अंजलि आखरी बार कह रही हु में अंदर जाओ "

अंजलि ने मुझे और कस के गले लगा लिया जिसकी वजह से मेरा खड़ा लंड उसकी कुंवारी चूत पे चुभ ने लगा और उसके निपल भी मेरी छाती में चुभ रहे थे

अंजलि अब रोने लगी थी जो अब मुझे बर्दास्त नही हुआ

" क्या कर रही हे ..आप अगर इतनी ही प्रॉब्लम हे अंजलि से तो में उसे अपने घर ले जाउगा मगर इतना गुस्सा हद होती हे "

बहार चल रही नोक जोक को सुन कर सासु माँ भी बहार आ गयी

मगर सासुमा की भी स्नेहां के आगे नही चलती थी ..यहाँ तक की ससुरजि की भी फट जाती थी स्नेहा की डांट सुन क्र
स्नेहा का मुकाबला कोई कर सकता था तो वो थी मेरी पत्नी पायल ..मगर उसकी शादी हो जाने के बाद तो स्नेहा रानी बन चुकी थी

सायद उसका गुस्सा भरा स्वाभाव ही कारन था की उसकी शादी नही हो रही थी

ममीजी भी वहा आकर तमासा देखेने लगी

मेने अंजलि का हाथ पकड़ा और उसे लेजाने लगा " चलो अंजलि "
मम्मीजी को कोई ऑब्जेक्शम नही था क्यों की उसी में अंजलि की भलाई थी आखिर डर डर कर कब तक रहती वो आखिर उसकी भी कोई ज़िन्दगी हे

और में कुछ ही पल में अंजलि के साथ अपनी कार में बेठा था और कार स्टार्ट कर रहा था ..अभी भी अंजलि के आँखों में से बहती गंगा बहती जा रही थी

http://storieswithmovies.blogspot.in/2016/03/hindi-sexy-story.html
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Madam ne Banaya Madarchod-Hindi sex story

Thursday, 17 March 2016 | 0 comments


 
Yeh baat tab ki hai jab main 2 baar 12 class mein fail ho chuka tha Or ek baar board change kar chuka tha.
Mera naam Ajay Mehera hai mere ghar mein 5 members hai main mere papa meri mummy mere se badi do didi .
Anjali ki umar 25yrs hai unki shaadi ho chuki hai or jijaji k saath Bangalore mein reheti hai..
Priyanki ki umar 24 saal hai or m.sc final yr ki student hai.
main abhi18 saal 2 mahina hai... mughe ghar main sab nandu kahete hai aur mughe apne se zaada umar ki ladkion mein zaada interest hai.

meri maa ka naam dolly hai aur woh bohot hi kamuk dikhti hai .
mere papa ka naam Rakesh hai woh merchant navy mein officer hai.

jis din mera result nikla or main dubara fail hogaya tha tab papa ghar par 3 mahine ki chuti par hi hai..
Ghar aaya toh sabhi ne mughe bohot data or maara bhi ..
or 1 din khana bhi nahi diya ..
Ussi tym papa ke kisi colleague ka phn aaya haal chal puch ne ..aur papa ne baaton baaton mein apni sari pareshani unko bata di ..fir unhone kya bola woh main nahi janta.
Sham ko 8 baje papa mughe apni bike par baitha k ek ghar k samne le aa gaye..
fir papa ne calling bell bajai thodi der mein ek 35 saal ki aurat ne gate khola .
dikhne mein average se upar thi or unka figure bohot accha tha..
jab papa or unki beech mein baatien ho rahi thi toh pata chala k abb yeh mughe padhaya karengi...
Jab main aur papa ghar pohoc gaye tab papa ne bataya k mughe kal se hi unke pass jana hai..
Mughe thoda sa aaise laga jaise main unki gulami kar raha hun fir mann mein aaya k
Papa hi hai or parso toh woh waise hi duty join karne k liye chale jayenge fir toh aaish hi aaish hai .
Us din or kuch khash nahi hua fir main jab nxt day uttha tab papa ne bola tumhe mam k ghar 10 baje hi jana padega .
Main bhi 10 baje mam k ghar par pohoc gaya.. or bell bajai.. thodi der mein hi door khula or mera muh khula ka khula hi rehe gaya..
Mam:- gud morning boy.. andar aao..
or jaa kar sofe pe baith jao. main abhi aati hun.
thodi der baad
mam k haath mein namkeen or cold drink ka glass le kar table par rakh diye.
Mam:- tum +2 mein do baar fail kaise ho gaye tum dikhte toh chalak hi ho...
me:- mam mughe kuch padha nahi jata jab hi padhne baith ta hun tab hi kuch na kuch dimag mein chalne lagta hai or concentration nahi aata ..
mam:- tumhe main ek cheez clear kar dun main koi teacher nahi hun woh toh mere husband ne zidd kari toh main tumhe padhane k liye razi ho gai...
waise agar tum apni girlfriend pe thoda kam or padhai pe zaada dhyan do toh tum aram se pass ho jaoge ... +2 mein toh padhai easy hoti hai...
toh agar hum dost jaise padhai karenge toh tumhe concentration ka issue nahi hoga.. or iss liye tum mughe dost jaise hi treat karna .. toh chalo apna introduction do taki hum ek dusre ko jaan sake..
me:- mera naam ajay hai main 18 saal ka hun main do baar 12th mein fail ho gaya hun aab maine iss liye board change kar diya hai. pehele main ICSE mein tha aab CBSE mein hun..
mam:- mera naam Sandhya hai main tumhare dad k colleague ki wife hun main pichle saal hi p.g complete kiya hai.. toh tum mughe aunty bula sakte ho madam bol ne ki zarurat nahi hai. or mere pati k request par hi tumhe padhane k liye razi hui hun...
aare baat toh hoti rahegi.. pehele nasta kar lo.. yeh bolte hue Sandhya ne cold drink ki glass uthane k chakker mein jaan bujh kr apna aachal niche gira diya .kyu ki Sandhya ka pati bhi merchant navy mein tha toh woh bhi saal mein 3 mahine hi ghar par raheta hai...
issliye Sandhya yeh sotch rahi thi k agar iss chokre ko pata liya jaaye toh usske problem ka solution nikal aayega or kisi ko khabar tak nahi hogi..
aur idhar main chori chori madam k cleavage ko dekhe jaa raha tha toh iss k aasar hua ki mere bamboo ne pant par tamboo khada kar diya jo Sayad mam ko dikh gai thi..
mam:-(dhere se) zara dekh toh kaise mere bobbo ko kha jane wale tarike se ghoor raha hai ...iss se toh apni chut kutwaungi hi or iss ko madarchod bana k chodungi.. aaise ladke baas chudai k liye bane hai ... dekho toh kittna bada tamboo banaya hai...
madam:- aacha ek kaam karo aaj tum jao kal se hum roz 8 Ghanta padhai karenge or khub mehent karenge. . dekhti hun tum kaise pass nahi ho .. tumhe main har cheez mein expect bana k rahungi.. or haa kal saath mein half pant bhi le aana 8 ghanta full pant mein dikkat hogi tumhe. .
bye
me:- thankyou mam..
or main ghar aa gaya
jab ghar wapas aaya toh mummy ne pucha k kya karwaya madam ne toh maine sab bol diya jo bolna chahiye tha..
Mummy:- tu ghar mein khana or hugna chord k kuch karta toh hai nai ek kaam kar tu madam k ghar 12 ghanta raha kar iss se tu kuch toh padega...or tere p.c ko main aaj hi bikwa deti hun ..
badi didi:- maa main abhi olx par add post kar deti hun..
or ek uss kamini ne satch mein add post kar bhi diya..
shayam ko ghar ka bell baja toh papa ne door khola toh ek panjabi ladka aayaa tha
ladka:- aap k ghar mein ek p.c bikau hai main uss k liye aaya tha.
papa:- aap ko kis ne bola??
ladka:- pata nai koi ladki thi phn par maine olx par add dekh k call kiya tha . ek minute main unko call kar leta hun.
ussne didi k cell par phn kiya
badi didi:- aap aa gaye ho kya main abhi niche aati hun .
jab didi aai toh didi ne usse p.c de diya.. or paise khud rakh lii.
main udas hi apne rum mein tha bed pe sote sote mughe madam ka cleavage yaad aaya or main madam ki fantasy kar k muth marne laga jab mera vireya nikal gaya.. toh bohot thakan si lag ne lagi or main soo gaya...
nind kuch aaisi aai k raat ko khana bhi yaad nahi aaya..
aab naa toh school jana tha naa hi koi dost allowed the.. aab ghar bhi mughe jail jaisa lagne laga tha..
subha utha toh didi k bag se 100 rupey le k nikal gaya madam jii k ghar or raste mein hi khana kha liya ghar mein kuch bola bhi nahi... bas nikal gaya..
madam k ghar pohoc kar bell bajai toh thodi der mein madam ne darwaza khula..
madam:- aagaye tum , thodi jaldi hi aa gaye tum toh ...
maine ghar ke sare kiss se bataye toh mera muh rone jaisa ho gaya
madam:- tumne harkat hi aaisi kari hai main hoti toh bhi yehi karti ..koi 12 class mein thodi 2 baar fail hota hai...
woh bhi biology chemistry jaise subject mein.. jo bhi ho andar aao or naha k apna pant change kar lo..
main chup chap bathroom mein chala gaya..
waha main nanga ho k nahane laga tension k mare mughe chaddi utarna yaad hi nahi raha or meri chaddi puri gili ho gai...
or jab mughe yaad aaya toh kuch karne ko bacha hi nahi tha ..
main ek baniyan or k barmunda (half pant) mein bahar aaya toh dekha madam ek robe pehen k sofa par baithi hui hai.
mughe issare mein unnke samne baith ne ko kaha. main chup chap udhar baith gaya...
madam:- tumhari kittni girlfriend hai.. jo ek bhi subject mein pass nahi ho sake English mein bhi fail ho gaye tum ....
maine apni nazar uthai toh dekha k madam k robe ki rassi khuli hui thi usse unki belly botton or panty dikh rahi thi ..mughe apni panty k oor dekhte hue pakad liya. . maine aaise nazara kabhi bhi nahi dekha tha .
mughe aaise dekhte hue dekha toh unhone apne pair ko aaise mod liye k unki chut k upar hi panty ka kapda dikh raha tha safed panty k chalte unnke panty k upar do gili bund ko asani se dekh sakta tha ..
yeh sab dekh k mera bamboo fir se tamboo bana liye or aaj toh chaddi bhi nahi thi.. mere chah kar bhi I usse chupa nai sakta tha...
mughe chatpata te dekh kar
madam:- be relax datz natural. .
maine tumhe kuch pucha tha kittni girlfriend hai teri...
me:- mmaa mmmmaaddaamm ee ek bhh bhi nnnaahii hai...
madam:- jhoot mat bolo..
madam apni tango ko chaudi karte hue..
me:- ddddo do bbbaaaar fail hoe k baaaad kon mm mughe bbb bhaw degi..
madam :- aare tum toh haklane lage ...
accha tumne kabhi nangi ladki dekhi hai ???

me:- nnnaahii m..mmadam.
madam:- main tumhe ek chance deti hun ..
agar tum khud padh kar aaj English k first chapter k 70 question mein se 70 yani k 100% sahi jawab dete ho toh main puri nangi ho kar tumhe padhaungi..
agar 70% sahi hue toh main utna hi utarungi or 50 sahi hone par 50% hi utarungi par agar 50% se niche raha toh tumhe saza milegi.. ek aur baat 100 se ek number bhi kam aaya toh woh 70 mana jayega .. 70 se kam aaya toh woh 50 mana jayega ...
tum 3 ghante tak apna chapter padho fir main question de dungi...
or iss k bare mein kisi ko kuch nahi batana.. samjhe babu...
me:- madam 70 ka 50% 35 marks hote hai.... or 70% 49 marks. .
madam :- chut dekh ne ki chahat mein apne aap hi maths sikh gaye tum... chalo tum padho.. abhi .

main sotch ne laga sala mughe computer par porn hi toh dekhna tha yaha toh live dekhunga .. bas sawal thik thak hi puche...
main 2 ghante tak padhta raha
fir maine mughe laga k main sab sawal k jawab de sakta hun ...
me:- mam aap mughe question de do..
mam:- sotch le agar marks nahi aaye toh punishment milegi..
me:- main answer likh dunga..
fir test start hua...
after 1 hrs
mam:- yeh sab kya hai ... yeh handwriting kisi bandar ki hai kya?? or 10 marks k liye 4-5 line k answers...
yeh lo 7 question k liye tumhe milte hai 28 marks...
khud dekh lo agar dought ho toh puch lena..or punishment k liye ready ho jao..
pata nahi madam ko kya hua mam ne apna robe uttar feka .. fir mughe se kaha
mam:- tumhari saza yehi hai k tum nange rehe kar aaj 5 ghante porn dekhoge par muth nahi maroge jab tak tum 70 mein70 nahi late .. maine tumhe writing skills sikha deti hun ..
or agar baat nahi mani toh aaise nanga hi raste par chord dungi tughe.
main bina kuch bole apne badan se baniyan or half pant nikal diye. or mam ne 5 ghante k porn back to back laga di or phir kitchen meib khana banane chali gai ... magar jaane se pehele mere haatho ko bandh diye. .
2 ghante tak toh bardaast kar liya fir mughe pagal sa lagne laga ..
par kar kuch nai sakta tha ..
usske or ek ghante bad mam lunch le ke aai.. tab tak mere nunni laude ka baap ban chuka tha Ittni khoon jam chuka tha lund par k lagene laga yaa toh koi zeher de de yaa fir haath khol de k maal nikal lun apna. . madam meri aaisi halat pe bhi taras nahi khai..madam:- mein tere haath khol dungi agar tu meri har ek baat ka sahi jawab dega... kya chahta hai satch bolega yaa aaise tadap ta rahega..

madam tabhi bhi wohi bra panty peheni thi ek toh porn chal rahi upar se madam k adh nange sharir ne mughe pagal bana diya .
me:- aap jo bologe wohi karunga bas mere haath khol do..
madam:- toh bol teri kittni girlfriend hai .
me:- satch mein ek bhi nahi hai..
madam:- tughe aurat pasand hai apni umar ki ladkiyan ...
bina kuch sotche hi muh se nikal gaya..
me: - aurat.
madam:- fir toh tu apni maa ko bhi chodna chahta hoga..
madam ka ittna kehena hi kafi tha k lcd mein chal rahe porn ki heroine bhi mughe mummy jaisi dikhne lagi....
______________________________
read my story. . and rate it..

TIJIRA..
Madam ne Banaya Madarchod-Hindi sex story
fir Maine madam ki orr dekha aab madam bhi mughko mummy jaisi or nangi dikhane lagi.. mera dimag kam karna bhool chuka tha...
me:- thoda pani de do..
madam:- pehele jawab de..
mughe madam ka question bhi yaad nahi tha .. pyas ke chalte maine
me:- haan.

Madam ne Banaya Madarchod-Hindi sex story
madam:- accha fir yeh bata//--
madam ki baat ko kat te hue maine kaha
me:- madam pani...
madam freeze se pani ki bottle le k aai or ek khuli dawai le k aai..
madam:- pani tabhi dungi jab tu pani k saath yeh dawai lega ..
main bhi bina chu cha kiye dawai or pani dono pii gaya...
pehele toh thodi rahat mili aur fir jo hua woh mughe aur pagal bana chuka tha..
mere shareer se sara ka saara khun mere lund par jama hone laga..
or mere Lund pehele se bhi thoda lamba hone laga aab toh aakho k saamne andhera chaa me laga...
madam:- tumhe pata hai tumne konsi dawai li hai...
vigra naam suna hai kabhi... heee heee heee aab tumhara lund 2 ghante tak khada hi rahega chahe jittna muth maar lo...
aab mughe promise k meri haar baat mano ge...
warna tumhari haalat iss se bhi zaada kharab kar sakti hun ...
waise bhi bhalai tumhari hi hai

tum roz ghar jaa kar tumhari choti didi se physics or maths padhoge woh physics mein hons hai naa... usse math bhi acchi tarah se aata hoga.. aur roz jo bhi padhaya mughe dikhana..
main bhi tumhe 3 ghanta hi padaungi aur baki ka time tum self-study karoge..thik hai..
ek baat aur tum kal apni mummy ka ek photo aur unnki bra panty chura kar laoge...thik hai...
me:- yes madam ..
madam:- yeh sattar question wala offer kal bhi valid hai .. par kal chapter 2 k liye..
aaj main tumhe aaj k saare question ke answers ka print de deti hun usse padh kar kal issi style mein saare answer dena ..
me:- okay madam. .
madam:- mughe tumhari choti didi ka phn no de do..
me:- xxxxxxxxxx
madam:- aab tum jao.. main tumhare ghar par phn pe baat kar lungi.. thik hai...
arre haan tumhari chaddi abhi bhi gili hai.. main tumhe apni chaddi deti hun tum usske upar kapde pehenlo . meri chaddi less wali hai toh tughe koi size ka problem nahi hoga .
or tu apne ghar jaa kar hi isse hilana yaha nahi...

abhi bhi mughe dawai or po ka aasar tha or thode bohot pre-cum bhi aa chuka tha mere bamboo se... main jaise taise madam ki chaddi peheni fir jeans or t-shirt pehen liye .. mughe bohot uncomfortable la raha tha . madam k chaddi k wajah se mera land or zaada zhatke mar raha tha.. fir main jaise madam k ghar se nikal toh dekh 5 baj rahe the . aur sare buses khacha khach jaam thi...
 
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Passion and Romance: Double Your Pleasure-Erotic Movie

Friday, 11 March 2016 | 0 comments


Passion and Romance: Double Your Pleasure

Year: 1997
Duration: 01:25:43
Directed by: Antonia Keeler
Actors: Tracie May, Robert Donavan, Gabriella Hall
Language: English
Country: USA
Also known as: Passion and Romance, Paixão e Romance - Prazer em Dobro, Das Lustobjekt, Ménage à trois, Passion et romance: quitte ou double
Description:
In this traditional softcore movie, sexy, successful romance novelist Kathleen Connell meets a suave, good-looking fan, Jack Mandel, at a book signing for her latest novel, Passion and Romance. After signing Jack's book, Kathleen imagines making passionate love with him. When Jack asks Kathleen to dinner the next night, she gives him her phone number, but their attempt to hook up fails, leaving Kathleen to imagine the beginning of her next erotic novel. In the novel Melissa Lamb (Gabriella Hall) comes to LasVegas for a computer conference. In fact, the conference is not all she came to Las Vegas for: She is there to play games both at the blackjack tables and in her hotel room. The next night, after they again agree to get together, Jack stands Kathleen up, leaving her to write the next chapter of her book. Finally, they hook up in Los Angeles where Kathleen's old friend Debora gives her material for the final chapter of her book.

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Monday, 7 March 2016 | 0 comments

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Antarvasna Hindi sex stories Kamukta-पहली बार चुद कर भैया के साथ सुहागरात मनाई

Sunday, 6 March 2016 | 0 comments

Hindi sex stories 
पहली बार चुद कर भैया के साथ सुहागरात मनाई



पहली बार चुद कर भैया के साथ सुहागरात मनाई

हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं शामली की रहने वाली हूँ..

आज आपके साथ मैं अपनी सच्ची कहानी बाँटने जा रही हूँ।

सबसे पहले मैं आपको आपने बारे मैं बता दूँ.. मेरा फिगर 34-30-34 है।

हम 3 बहनें और 1 भाई हैं।
एक बहन मुझसे बड़ी है और एक मुझसे छोटी है..
भाई सबसे छोटा है।

यह बात आज से 3 साल पहले की है।
जब मैं अपनी बुआजी के यहाँ घूमने गई थी और बुआजी बीमार भी थीं.. तो मैं वहाँ एक महीना रहने के लिए आई थी।

ठंड के दिन थे.. जनवरी का महीना था।

वहाँ मेरे भैया यानि की बुआजी के लड़के थे.. जो मुझे देख कर बहुत खुश हुए।

उनका नाम सचिन है.. वो मुझे अपनी सबसे अच्छी बहन मानते थे और मुझे बहुत प्यार करते थे।

जब मैं बुआ के घर पहुँच गई तो फूफा जी बुआ को हस्पताल दिखाने ले गए और उनको वहीं भरती कर देना पड़ा और वो घर वापस नहीं आ पाईं और उस रात को घर में सिर्फ हम दोनों ही थे, वो भी अकेले..

रात को खाना खा कर जब हम दोनों सोने चल दिए तो भैया ने कहा- दो बिस्तर की क्या जरूरत है.. आज एक बिस्तर में ही सो जाते हैं।

तो हम दोनों एक बिस्तर में ही लेट गए।

भैया को कपड़े निकाल कर सोने की आदत है.. तो वो कपड़े निकाल कर मेरे पास आ कर लेट गए।

मुझे बहुत अजीब सा लगा.. क्योंकि मैं आज तक किसी लड़के के साथ ऐसे नहीं लेटी थी।

भैया मेरी पढ़ाई के बारे में पूछने लगे और अपनी पढ़ाई के बारे में बताने लगे।

थोड़ी दर बात करने के बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं भैया से कह कर सोने लगी।

वे भी सोने लगे।

अभी कुछ ही देर हुई होगी कि भैया का लंड मेरे पीछे मेरी गाण्ड में घुसने तो तैयार सा लगा।

तो मैंने अपने हाथ से हटाने के बहाने उसे छू कर देखा.. तो वो बहुत मोटा और लंबा था और गरम भी हो रहा था।

भैया भी अभी तक सोए नहीं थे।

जैसे ही मैंने उनके लंड को छुआ तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मुझे चुम्बन करने लगे।

मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

मैं भी उनको चुम्बन करने लगी।

भैया ने पूछा- तेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड है क्या?

तो मैंने मना कर दिया।
वैसे भी मेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड था भी नहीं..

भैया मुझे चुम्बन करते रहे, वे कभी गालों पर चूमते, कभी मेरे होंठों पर.. कभी पेट पर..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत गीली हो गई थी।

थोड़ी देर बाद भैया ने मेरी सलवार में अपना हाथ डाल दिया।
मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैंने भी उनके अंडरवियर में हाथ डाल दिया।

फिर भैया ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैन्टी नीचे करके मेरी चूत को चाटने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर भैया ने मुझसे कमीज उतारने को कहा तो मैंने बिना देर किए अपना कमीज उतार दिया और ब्रा भी उतार दी।

अब मैं बिल्कुल नंगी भैया की बाँहों में थी।
वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और पी भी रहे थे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद भैया अपना लंड हाथों में लेकर बोले- अब इसे अपने मुँह में ले ले।

मैंने कभी ऐसा किया नहीं था तो मैंने मना कर दिया।

उन्होंने अपनी कसम दी.. तो मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद उन्होंने अपना सारा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।

फिर हम थोड़ी देर चुम्बन करते रहे।

चूमा-चाटी के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो मेरी चूत पर लवड़ा रख कर मुझसे बोले- मुझे होंठों से चुम्बन कर और नीचे अपनी जाँघों को ढीला कर..

मैंने ऐसा ही किया.. कुछ पलों तक चुम्बन करने के बाद उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा उनका आधा लंड मेरी चूत में चला गया।

मुझे बहुत दर्द हुआ.. मेरी चीख निकल जाती.. अगर भैया के होंठ मेरे होंठों में ना चिपके होते।

मेरी चूत से खून भी निकल रहा था..
इससे पहले मुझे थोड़ा आराम मिलता.. कि भैया ने एक और धक्का मारा.. अब पूरे का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

फिर थोड़ी देर बाद जब मैं सामान्य हुई तो उन्होंने मुझसे पूछ कर धक्के मारने शुरू कर दिए।

करीब 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैं और भैया एक साथ झड़ गए।

भैया ने अपना लंड और मेरी चूत मेरी पैन्टी से साफ़ की और मुझे दर्द की गोली ला कर दी।

उस रात भैया ने मुझे 3 बार चोदा.. चुदाई करने के बाद हम नंगे ही सो गए।

बुआजी दो दिन बाद आईं.. इन दो दिनों में हमने खूब मज़े किए।

एक बार तो मैं दिन में रसोई में भी चुदी…

उस दिन के बाद भैया मेरे लवर बन गए और भी एक साल बाद मैं दोबारा बुआजी के घर गई तो बुआजी और फूफाजी कहीं बाहर चले गए तो भैया ने मेरी माँग भर दी और मुझे अपनी घरवाली बना लिया.. वे मुझे साड़ी पहनाने लगे।

मुझे साड़ी पहना कर उन्होंने मुझसे कहा- आज हमारी सुहागरात है।

हमने सुहागरात मनाई।

आज भी हम दोनों सब के सामने भाई-बहन हैं और अकेले में पति-पत्नी की तरह रहते हैं।

अब मेरे भैया मेरी जान बन गए हैं।

मैंने उनका नाम प्यार में ‘जानू’ रखा है। हमें जब भी मौका मिलता है चुदाई जरूर करते हैं।

तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। कैसी लगी आपको..
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